What Causes Blood Disorders? रक्त विकार के कारण है ?

रक्त विकार के कारण है ?

        रक्त-विकार के अनेकों कारण हो सकते हैं, जो गर्भाशय की रसौली ही नहीं और भी अनेकों रोगों को बढ़ावा दे सकते हैं । रक्त विकार के यह मुख्य तीन कारण हैं ।

  1. चाय का सेवन :

            काली चाय की पत्ती में 11 प्रकार के घातक विषय पाए जाते हैं जो शरीर के आंतरिक और बाह्य जगत  में हलचल पैदा करते हैं ।

महात्मा गांधी जी ने कहा था कि चाय शराब से भी अधिक घातक है क्योंकि शराब में तो एक एल्कोहल इसके अलावा और भी एक-दो विष पाए जाते होंगे, परन्तु चाय की पत्ती में 11 घातक विष हैं, वे विष हैं तो घातक परन्तु हल्के रूप में पाये जाते हैं जो धीरे-धीरे तन व मन को दुर्बल बना देते हैं ।

            चाय पीने वाला व्यक्ति चाय का आदि बन जाता है, जैसे शराब  पीने वाले को शराब अवश्य चाहिए, ठीक उसी प्रकार जीसे चाय की आदत पड़ गई हो उसे समय पर अवश्य चाहिए, अन्यथा शिरदर्द प्रारंभ हो जेता है । इस लिए चाय के लिए तो एक ही रास्ता है चाय का धैर्य के साथ, संकल्प के साथ परित्याग।

  • चीनी :

गर्भाशय का रसौली का एक कारण रक्त-विकृति भी है और रक्त-विकृति का एक कारणअत्यधिक चीनी (शक्कर) का सेवन भी है । क्योंकि की

शक्कर का सेवन करने से केवल रक्त-विकृति ही नहीं होती है बल्कि और अनेकों रोगों की उत्पत्ति होती है ।

            चीनी सेवन  में सबसे बाडा दोष यही है की चीनी गले से नीचे उतरते ही एसिड (अम्ल) में बदल जाती है । इसके साथ ही चीनी में एक भी विटामिन नहीं पाया जाता है । विचारक और चिंतनशील महापुरुषों का कहना है कि यह लाभ के रूप केवल मिठी राख है चीनी के सेवन से दूर रहने का प्रयश करें ।

            आज के युग में बाजार में यदि कोई भी मीठी वस्तु खरीदने जाओ तो हर मीठी वस्तु चीनी (शक्कर) से निर्मित ही मिलेंगे । इस लिए गर्भाशय की रसौली के निर्माण में अधिक मात्रा में सेवन की गई चीनी एक मुख्य कारण है ।

  •  नमक :

एक समय ऐसा था जब लोग आत्महत्या करने के लिए नमक का सेवन किया करते थे, आज नमक का सेवन भी इसी प्रकार मानो सर्वव्यापक हो

गया है अत्यधिक नमक की मात्रा शरीर में पहुंचने के कारण भी रक्त-विकृत हो सकती है, इसी प्रकार गर्भाशय की रसौली में नमक का अत्यधिक सेवन भी है ।

1. मुर्दों को गलाने  के लिए कब्र में नामक डाला जाता था और जाता है । मुझे स्मरण आ रही है अपने बचपन की एक घटना-जब कोई गाय मर जाती थी तो उसे गलाने के लिए नमक  के साथ गड़हे में दबाया जाता था । ।

2. आप 25-50 ग्राम नमक शरीर के किसी भी भाग पर बांधकर सो जायें, प्रातः काल तक संभवतः वह अंग गल जाएगा अथवा त्वचा का रंग बदल जायेगा ।

3. जोक नाम का कीड़ा जो प्रायः वर्षा ऋतु में अधिक दिखाई देता है यदि किसी को चिपक जाये तो शीघ्रता से नहीं छूटता, उसके मुख में नामक डाल दो स्वयं ही छूट जायेगा ।

4. अत्यधिक नमक शरीर के आंतरिक अवयवों क्षति पहुंचता है और अनेकों रोगों को उतप्पन करता है ।

5. अत्यधिक नमक सेवन से दाद, खाज, खुजली, एग्जिमा, सोरायसिस, कुष्ठ, सफेद दाग, महांसे, झाईयां, रक्त-विकृति, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग इत्यादि उत्पन्न होते हैं।

6. अत्यधिक नमक सेवन करने से शरीर और मन दोनों ही विकृत हो जाते हैं, शरीर अन्दर से गलना प्रारम्भ हो जाता है।

  • शरीर के पोषण के लिये प्रकृति ने सब्जियों और फलों में वे पोषक तत्व दिये हैं जो उत्तम स्वास्थ्य प्रदान की क्षमता रखते हैं।
  • अलग से उबाल कर नमक और मसालों को मिला कर खाने से जीभ का स्वाद तो शायद बन जाये परन्तु स्वास्थ्य नहीं बनेगा।
  • अच्छे गुरुकुलों-आश्रमों में आज भी ब्रह्मचारियों एवं साधकों को भोजन में नमक से बने पदार्थ नहीं दिये जाते हैं। नमक की मात्रा शरीर में अधिक न

 पहुंचने के कारण स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है या यह कहिये रोग शरीर में प्रवेश ही नहीं करता है।

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कब्ज का सही इलाज

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कब्ज़ क्या है ?

कब्ज का मतलब है कि मल का त्याग न होना। मल का त्याग कम होना। मल में गांठे निकलना। ज़्यदातर पेट साफ न होना। रोजाना टट्टी नहीं जाना । भोजन पचने के बाद उत्पन्न हुआ मल पूरी तरह से साफ न होना, टट्टी जाने के बाद पेट साफ और हल्का न होना आदि को कब्ज कहते हैं ।

जब भी किसी व्यक्ति को मल कम मात्रा में आता है या मलक्रिया में पीड़ा होती है और पेट में वायु बनती है तो इसे कब्ज का रोग कहा जाता है । जब कब्ज का रोग काफी बिगड़ जाता है तो रोगी के मलद्वार पर दरारे तक पड़ जाती है और घाव बन जाते हैं ।

यदि इस रोग का इलाज जल्दी नहीं कराया जाता तो यह रोग आगे चलकर बवासीर, मधुमेह तथा मिर्गी जैसे रोग को जन्म दे सकता है। इस रोग के कारण शरीर के अन्दर जहर भी बन जाता है। जिसके कारण शरीर में अनेक बीमारी पैदा हो सकती है जैसे- सिरदर्द, थकान, अफारा तथा पेट दर्द आदि । कब्ज से पीड़ित रोगी को मलत्याग करने में बहुत अधिक पीड़ा होती है। इस रोग के कारण से शरीर में कई प्रकार के ओर ज्यादा रोग उत्पन्न हो जाते हैं ।

कब्ज रोग होने के लक्षण क्या है ? 

कब्ज के रोगी को अनेक प्रकार के लक्षण माने जाते हैं ।

जैसे-

  1. पेट में भारीपन होना ।
  2. पेट में दर्द ।
  3. भोजन में अरुचि (भोजन अच्छा न लगना) ।
  4. सुस्ती और बेचैनी ।
  5. जी मिचलाना ।
  6. सिर में दर्द होना ।
  7. पेट में दर्द होना ।
  8. चक्कर आना ।
  9. खांसी, श्वास (दमा) ।
  10. बवासीर (अर्श) आदि ।
  11. कब्ज रोग से पीड़ित रोगी की जीभ सफेद तथा मटमैली हो जाती है ।
  12. कब्ज रोग से पीड़ित रोगी के पेट में गैस अधिक बनती है। पीड़ित रोगी जब गैस छोड़ता है तो उसमें बहुत तेज बदबू आती है ।
  13. कब्ज के रोग से पीड़ित व्यक्ति के मुंह से भी बदबू आती रहती है ।
  14. इस रोग में रोगी को बहुत कम भूख लगती है ।
  15. कब्ज रोग से पीड़ित रोगी के सिर में दर्द भी होता रहता है ।
  16. कब्ज रोग से पीड़ित रोगी को कई प्रकार के और भी रोग हो जाते हैं जैसे- मुंहासे निकलना, मुंह के छाले, अम्लता, चिड़चिड़ापन, गठिया, आंखों का मोतियाबिन्द तथा उच्च रक्तचाप आदि ।

कब्ज होने के क्या कारण है ? 

सामान्य तोर पर यहा बताए गए कारणो के वजह से ही कब्ज होता है। परंतु रोगी यही सब वजह को नजर अंदाज करता है । 

1. खानपान सम्बंधी गलत आदतें जैसे- समय पर भोजन न करना ।
2. बासी और अधिक चिकनाई वाला भोजन खाना ।
3. मैदा आदि से बनाया गया मांसाहारी भोजन खाना ।
4. भोजन में फाइबर की कमी ।
5. अधिक भारी भोजन अधिक खाना ।
6. शौच को रोकने की आदत ।
7. शारीरिक श्रम न करना ।
8. विश्राम की कमी ।
9. मानसिकतनाव (टेंशन) ।
10. आंतों का कमजोर होना ।
11. पानी की कमी ।
12. गंदगी में रहना ।
13. मादक द्रव्यों का सेवन ।
14. एलोपैथी दवाइयों के दुष्प्रभाव के कारण ।
15. भोजन के साथ अधिक पानी पीने ।
16. मिर्च-मसालेदार तथा तले हुए पदार्थ जैसे पूरी-कचौड़ी, नमकीन, चाट-पकौड़े खाने ।
17. अधिक गुस्सा, दुःख आलस्य आदि कारणों से कब्ज हो जाती है ।
18. उरपर दिये गाय कारणो को दूर केरके हम कब्ज को दूर कर सकते है । ओर वह भी बिना किसी दवाई के बिना ।

कब्ज रोग का प्राकृतिक उपचार क्या है ?

            कब्ज के रोग मे दर्दी को दस्त लाने की दवा नहीं लेनी चाहिए। बल्कि कब्ज के कारणो को दूर करके प्राकृतिक उपचार करना चाहिए ।

1. हरी पत्तेदार सब्जी को चब्बा चब्बा कर खाना चाहिए ।
2. ज्यादा से ज्यादा बिना पका हुआ भोजन करना चाहिए ।
3. अंकुरित अन्न का सेवन करने से बहुत फाइदा होता है ।
4. कब्ज के रोग मे व्यक्ति को ज्यादा से ज्यादा फल ओर हरी सब्जी का सेवन करना चाहिए ।
5. गेहु का रस पीने से रोगी को बहुत ज्यादा फाइदा मिलता है।
6. कच्चे पालक का रस हर रोज पीने से कब्ज कुछ ही दिन मे ठीक हो जाता है ।
7. हर रोज सुबह उठते ही 2 से 4 ग्लास पानी पीने के बाद ही चौस के लिए जाना चाहिए ।
8. हर रोज 5 से 10 मिनट्स रनिंग करना चाहिए।
9. भोजन करने के बाद हर रोज 5 से 10 मिनट्स व्रज्रासन करना चाहिए ओर सुबह उठाने के बाद भी वज्रासन करना चाहिए ।
10. रोगी को हर रोज सुभ 2 सेब दांत से सबा सबा कर खाना चाहिए ।
11. व्यक्ति को जब भूख लगे तब ही खाना चाहिए ।
12. जब भी प्यास लगे तब तुरंत पानी पीना चाहिए। काब्ज रोग के समय पानी की मात्र ज्यादा करनी चाहिए ।
13. व्यक्ति को
ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
14. व्यक्ति को हर रोज व्यायाम ओर
प्राणायाम करना चाहिए ।
15. हमेशा खुश रहना चाहिए ।

ऊपर बताए गए पॉइंट आप फॉलो करते है तो आपको कभी भी कब्ज नहीं होंगा। ओर होंगा तो जल्दी ही आप ठीक हो जाएंगे ।

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